Friday March 24,2017

क्या हैं फ्री और फुल-फ्लोट

Published Sep 04, 2016   मोलतोल संवाददाता  

शेयर बाजार के इंडेक्‍स में किसी कंपनी का वेटेज (भारिता) तय करने के लिए दो विधियां हैं। एक, फ्री फ्लोट और दूसरी, फुल फ्लोट। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्री फ्लोट विधि को तरजीह दी जाती है क्योंकि इसके तहत कारोबार के लिए उपलब्ध शेयरों को हिस्सेदारी तय करने के समय आधार बनाया जाता है।

फ्री फ्लोट: इस विधि के तहत इंडेक्‍स में कंपनी का वेटेज इसके कारोबार के लिए उपलब्ध शेयरों के आधार पर तय किया जाता है। इसमें उन शेयरों को गणना नहीं की जाती है जो प्रवर्तकों और संस्थानों के पास होते हैं। इसके परिणामस्वरूप जिन कंपनियों में प्रवर्तकों या संस्थानों के पास ज्यादा संख्या में शेयर होंगे, उनके वेटेज में कमी आएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्री फ्लोट विधि को तरजीह दी जाती है क्योंकि इसके तहत कारोबार के लिए उपलब्ध शेयरों को हिस्सेदारी तय करने के समय आधार बनाया जाता है।

फुल फ्लोट: इसके तहत इंडेक्‍स में कंपनी का वेटेज उसके कुल बाजार पूंजीकरण के आधार पर तय होता है। इसमें प्रवर्तकों और संस्थानों के नियंत्रण वाले शेयरों को भी शामिल किया जाता है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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