Tuesday May 30,2017

माल्‍ट इंडस्‍ट्री के लिए बेस्‍ट रहेगा यह वर्ष : विनायक चौधरी

Published Feb 01, 2016   मोलतोल संवाददाता  

देश में इस साल जौ की बोआई घटी है और उत्‍पादन भी गिरेगा जिसका माल्‍ट कंपनियों के कारोबार कैसा असर पड़ेगा। जौ के दाम में इस साल उपज घटने से किस तरह का मूवमेंट देखने को मिल सकता है एवं एनसीडीईएक्‍स में चल रहे जौ वायदा में अधिक से अधिक कारोबारी क्‍यों नहीं जुड़ना चाहते हैं, जैसे अनेक अहम सवालों पर माउंट माल्‍टब्रू लिमिटेड, जयपुर के फाइनेंस कंट्रोलर विनायक चौधरी से मोलतोल डॉट इन ने बात की। पेश है बातचीत के मुख्‍य अंश:

वर्ष 2015 माल्‍ट इंडस्‍ट्री के लिए कैसा रहा और 2016 से क्‍या उम्‍मीद है ?

वर्ष 2015 माल्‍ट इंडस्‍ट्री के लिए अच्‍छा रहा, अपसाइड का वर्ष रहा लेकिन यह वर्ष 2011-12 जैसा उम्‍दा साल नहीं रहा। लेकिन मुझे उम्‍मीद है कि वर्ष 2016-17 माल्‍ट इंडस्‍ट्री के लिए बेहतर वर्ष हो सकता है। इस वर्ष बीयर उद्योग की मांग तुलनात्‍मक रुप से अच्‍छी रहेगी, हालांकि, बीयर की मांग स्थिर चल रही है लेकिन वे अपनी क्‍वॉलिटी को बनाए रखने के लिए जौ का इस्‍तेमाल बढ़ाएंगे। बीयर के काम में लिए जाने वाले दूसरे अनाज की खपत कम करेंगे।

इस साल नए सीजन में जौ के दाम किस तरह मूवमेंट कर सकते हैं ?

जौ के दाम वर्ष 2015-16 में मंडियों में 1150 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास खुले थे जो ऊपर में 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक चले गए थे। इस साल नए सीजन में जौ के दाम मंडियों में 1250-1300 रुपए प्रति क्विंटल खुलने की उम्‍मीद है क्‍योंकि इस साल जौ की बोआई और उत्‍पादन दोनों पिछले साल से कम है। इस साल जौ के दाम सितंबर में फिर से बढ़कर 1600-1700 रुपए प्रति क्विंटल जा सकते हैं। लेकिन इसका 1800 रुपए के स्‍तर पर पहुंचना कठिन होगा। यदि ऐसा किसी कारणवश होता है तो विदेश से जौ का आयात करना ज्‍यादा अच्‍छा होगा क्‍योंकि उस जौ की क्‍वॉलिटी और यील्‍ड दोनों अच्‍छी बैठती है।

माल्‍ट कंपनियों की जौ में इस साल मांग कैसी रहेगी ?

जौ में हमेशा पहली मांग माल्‍ट कंपनियेां की ही आती है। कैटल फीड वालों की मांग जौ में हमेशा बाद में आती है और कम भाव पर वे खरीद करना पसंद करते हैं। जबकि, जौ की तंगी होने पर माल्‍ट कंपनियां भाव बढ़ाकर भी इसकी खरीद कर लेती है लेकिन कैटल फीड वाले ऐसे में दूसरे विकल्‍प अपनाना पसंद करते हैं। अपने देश में माल्‍ट कंपनियों की जौ में तकरीबन आठ लाख टन के करीब सालाना मांग रहती है।

जौ के इस साल आयात की कोई संभावना ?

जैसा मैंने पहले भी बताया कि जौ का दाम 1800 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर जाने पर ही इसके आयात के बारे में सोचा जा सकता है। यदि जौ इस लेवल के ऊपर बिकता है यानि 1900-2000  रुपए प्रति क्विंटल तो इसके आयात की संभावना निश्चित बढ़ेगी। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में इस समय जौ का दाम 285 अमरीकी डॉलर प्रति टन बोला जा रहा है। यदि यह जौ भारत आता है तो इसकी पहुंच 1900 रुपए प्रति क्विंटल बैठती है। घरेलू जौ के महंगा बिकने पर इसका यूक्रेन, कनाडा और आस्‍ट्रेलिया से आयात करना ज्‍यादा फायदेमंद होगा।

कमोडिटी एक्‍सचेंज एनसीडीईएक्‍स में चल रहे जौ वायदा में कारोबारियों की ज्‍यादा भागीदारी बढ़े, इसके लिए क्‍या सुधार जरुरी है ?

कमोडिटी एक्‍सचेंज एनसीडीईएक्‍स में जौ का जो वायदा चल रहा है उसमें कारोबारियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अहम कदम जयपुर/चौमू/श्रीमाधोपुर के जौ को श्रीगंगानगर के जौ की तुलना में 150 रुपए प्रति क्विंटल का प्रीमियम देना जरुरी है। जयपुर एरिया का जौ क्‍वॉलिटी के मुताबिक श्रीगंगानगर के जौ से कही बेहतर है। या फिर श्रीगंगानगर के जौ को 150 रुपए प्रति‍ क्विंटल का डिस्‍काउंट दिया जाए। माल्‍ट कंपनियां जयपुर साइड का जौ लेना पसंद करती है जिसकी क्‍वॉलिटी उम्‍दा है जबकि श्रीगंगानगर साइड का जौ कैटल फीड में जाता है। एक्‍सचेंज को दोनों जौ को क्‍वॉलिटी अंतर होने के बावजूद एक समान नहीं रखना चाहिए। यदि एक्‍सचेंज ने यह सुधार नहीं किया तो उसके वेयरहाउस में चौमू और श्रीमाधोपुर का जौ नहीं आएगा।

इस साल जौ की सप्‍लाई स्थिति कैसी रहेगी ?

देश में इस साल जौ का उत्‍पादन पिछले सीजन की फसल 16.20 लाख टन से कम होगा। इस साल अपर्याप्‍त बारिश, जमीन में नमी की कमी और सरसों एवं चने के आकर्षक भावों की वजह से जौ की बोआई प्रभावित हुई है। जौ फसल का अब तक जो आंकलन हुआ है उसके मुताबिक यह फसल पिछले साल के 16.20 लाख टन की तुलना में 80 फीसदी उपज रहेगी। नई फसल आने तक कैरी फारवर्ड शून्‍य होगा। यदि इस साल जौ की तंगी हुई तो इसका आयात केवल माल्‍ट के लिए होगा, कैटल फीड के लिए नहीं। यदि अगले 5-10 दिन में बारिश होती है तो श्रीमाधोपुर साइड जौ का दाना अच्‍छा एवं मोट बैठेगा लेकिन बारिश फरवरी आखिर में हुई तो जौ की क्‍वॉलिटी और दाना दोनों प्रभावित होंगे।

माउंट माल्‍टब्रू लिमिटेड किन-किन क्षेत्रों में सेवाएं देती है ?

माउंट माल्‍टब्रू की स्‍थापना वर्ष 1994 में हुई और हम ब्रेवरीज उद्योग को उच्‍च श्रेणी का माल्‍ट बनाकर देते हैं। जिससे बेहतर क्‍वॉलिटी की बीयर का उत्‍पादन हो सकता है। इसके अलावा हम डिस्‍टलरीज उद्योग को भी माल्‍ट की आपूर्ति करते हैं जो प्रीमियम अल्‍कोहल का उत्‍पादन कर सकती है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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