Monday September 25,2017

आयकर भरने के पहले ध्यान रखें

Published Jul 10, 2017   विवेक रस्‍तोगी  

हम लोग यही समझते हैं कि हम लोग बहुत सारा कर सरकार को दे रहे हैं और यह काफी हद तक सही भी है तो अब समय आ गया है कि हम अपने कर को रिकॉर्ड कर लें, मतलब कि आयकर के रिटर्न भर दें। आयकर के रिटर्न में आपको बताना होता है कि आपने साल भर में कितना कमाया और कितनी छूट आयकर में ली है और कितना आयकर अदा किया। आयकर का गणित बहुत सरल है, लेकिन फिर भी बहुत सारे आयकरदाता अपने टैक्स रिटर्न में गड़बड़ियां कर देते हैं। जिसके कई कारण होते हैं- लालच, नियमों का पता नहीं होना या फिर समय न होना। कुछ गलतियां बहुत गंभीर अपराध नहीं होती और आयकरदाता को कुछ अतिरिक्त शुल्क भर देना होता है। लेकिन कुछ गलतियां जैसे कि अगर आपने नगद जमा किया है डिमोनेटाइजेशन के पीरियड में या फिर आपके पास विदेश में संपत्ति है, आय हैं और आपने अगर नहीं दिखाई है तो आयकरदाता बहुत ही गंभीर समस्या में फंस सकते हैं।

आयकरदाता कैसे इन गलतियों से बचें - तो हम यहां पर कुछ तरीके बता रहे हैं जिससे 31 जुलाई तक आप अपने आयकर के रिटर्न को जब भरें तो आप इन सब बातों का जरूर ध्यान रखें। आयकर भरने के नियमों में पिछले कुछ सालों में बहुत सारे बदलाव हो गए हैं, लेकिन ईमानदारी से आयकर भरने वाले भी कई बार इन नियमों को समझ नहीं पाते हैं तो हम इन नियमों के बारे में भी बातें करेंगे। जिससे आपका रिटर्न बिना किसी गलती का हो।

1. आयकर का रिटर्न केवल तभी भरना है जब आपकी आय बेसिक लिमिट से ज्यादा हो: क्या वाकई में आप को आयकर का रिटर्न भरना है? बहुत सारे आयकरदाता इसी संशय में रहते हैं। आयकर के अधिनियम के अनुसार हर व्यक्ति को रिटर्न भरना है, अगर उनकी कुल कर योग्य आय बेसिक एकजेम्प्शन लिमिट से ज्यादा है साधारण आयकर दाता के लिए यह लिमिट 2.5 लाख रुपए है। वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) के लिए 3 लाख रुपए है, बहुत अधिक वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष से अधिक) के लिए 5 लाख रुपए की लिमिट है। ध्यान रखिए कुल कर योग्य आय की गणना सारे एकजेम्प्शन के बाद की छूट जैसे की मकान किराया, कन्वेंस और दूसरे अलाउंस कम करने के बाद होती है।

2. अपने टीडीएस की जानकारी फॉर्म 26 AS में जरुर देख लें: हमारा अगला कदम होना चाहिए जो भी कर हमारे लिए काटा गया है, वह हमारे पैन नंबर के साथ फॉर्म 26 AS में जरूर होना चाहिए जो भी आयकर हमारे सेवा प्रदाता द्वारा काटा गया है। वह फॉर्म 16 में दिखेगा वही आयकर फॉर्म 26 AS में ऑनलाइन भी आप देख सकते हैं। जब आप फॉर्म 26 AS देखें, तो आप सुनिश्चित कर लें कि आपने जो भी एडवांस टैक्स दिया है, ब्याज पर टीडीएस कटा है या अन्य आय, जिस पर टीडीएस कटा है, वह सब आपके फॉर्म 26 AS में क्रेडिट हुआ है। अगर उसके अंदर कुछ गड़बड़ी है तो आप तुरंत ही टीडीएस काटने वाले को सूचित कर ठीक करवा लें।

आयकर विभाग किसी दस्तावेज को आपके द्वारा दिए गए कर को मान्य करता है तो वह है फॉर्म 26 AS। एक बार आपने रिटर्न भर दिया तब आयकर विभाग आपके द्वारा भरे गए आयकर कटने की जानकारी और आपके फॉर्म 26 AS का मिलान करता है। अगर दोनों नहीं मिलते हैं तो 2 महीने के अंदर आयकर विभाग आप को नोटिस भेज देगा।

फॉर्म 26 AS को प्राप्त करना बहुत ही आसान है। अगर आप नेट बैंकिंग का उपयोग करते हैं और आप का पैन अपने अकाउंट से लिंक है तो केवल कुछ ही क्लिक में आप फॉर्म 26 AS प्राप्त कर सकते हैं। जो भी आयकर कटता है, उसे यहां अपडेट होने में थोड़ा सा समय लगता है।

3. कौन सा रिटर्न फाइल करना है: आयकरदाताओं के सामने सबसे बड़ा संशय यह रहता है कि वह कौन सा रिटर्न आयकर विभाग में दाखिल करें। तो यहां हम बता देते हैं कि अकेले व्यक्ति के लिए कौन से रिटर्न का उपयोग किया जा सकता है

आईटीआर वन या सहज फार्म
इसका उपयोग करिए अगर
• सैलरी या पेंशन से आय है
• एक हाउस प्रॉपर्टी से आय है
• अन्य कोई आय जैसे की ब्याज डिविडेंड इत्यादि
इसका उपयोग मत करिए अगर
• आप अपने पुराने घाटे को दिखाना चाहते हैं
• अगर आपकी आय 50 लाख रुपए से ज्यादा हो रही है
• अगर आप विदेश में संपत्ति रखते हैं
• अगर आपकी कृषि से होने वाली आय ₹5000 से ज्यादा है
• अगर कैपिटल गेन्स है
• अगर आपकी आय व्यापार या किसी और प्रोफेशन से है
• अगर आपकी आय 1 से ज्यादा घर से है यानी कि हाउस प्रॉपर्टी
ITR2
इसका उपयोग करिए अगर

• सैलरी या पेंशन से आय है
• हाउस प्रॉपर्टी से आय है
• कैपिटल गेन से से आय है
• अन्य स्रोतों से आय है
• आप किसी फर्म में पार्टनर हैं और उस से आय है
• विदेश में संपत्ति या विदेश से आय है
• कृषि से होने वाली आय अगर ₹5000 से ज्यादा है

यह फॉर्म ना भरे यदि

• आपकी आय व्यापार या प्रोफेशन से है

ITR3
उपयोग करिए अगर -

• व्यक्तिगत या एच यू एफ जिनकी आय प्रॉपर्टी बिजनेस या प्रोफेशन से है
• आपकी आय अगर हाउस प्रॉपर्टी सैलरी पेंशन एवं अन्य स्रोतों से है

उपयोग ना करें यदि -

• अगर आपने प्रोजेक्ट इन टैक्सेशन अप किया हुआ है

4. डीमोनेटाइजेशन के समय अगर नगर जमा किया है : अगर आपने अपने बैंक खाते में डीमोनेटाइजेशन के समय 2.5 लाख रुपए से ज्यादा नगद बैंक में जमा किया है तो यह अपने टैक्स रिटर्न में बताना होगा। आपको ध्यान रखना है कि छुपाने से कोई फायदा नहीं है क्योंकि आयकर विभाग को इसकी जानकारी पहले से है कि आपने कितना रुपया नगद आपके बैंक खाते में जमा किया है। जब आप अपने रिटर्न में यह जानकारी भरेंगे तो वह अपने पास वाली जानकारी से उसका मिलान करेंगे। अगर दोनों के बीच में कोई अंतर होता है तो उनको आयकर विभाग के नोटिस के लिए तैयार रहना चाहिए।

गलत रिपोर्टिंग करने पर पेनल्टी 50 से 200 फीसदी तक लग सकती है और यहां तक की गलत जानकारी देने पर सजा का प्रावधान भी है। आपको पता होना चाहिए कि अगर कोई भी व्यक्ति अपने खाते में एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपए से ज्यादा अगर नगद जमा करता है, किसी एक या एक से ज्यादा खातों में या फिर फिक्स डिपाजिट 10 लाख रुपए से ज्यादा नगद में बनाता है तो बैंक के द्वारा यह जानकारी आयकर विभाग को भेज दी जाती है।

5. अपने ब्याज और अन्य आय को रिटर्न में बताएं : अधिकतर आयकरदाता यह समझते हैं कि टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज टैक्स फ्री है। ध्यान रखें अगर आप टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा कर रहे हैं, तो आप सेक्शन 80सी में आयकर बचाने का फायदा ले सकते हैं। लेकिन ब्याज पर आयकर देना होगा दो साल पहले तक किसी एक ब्रांच में अगर आपका ब्याज एक वित्तीय वर्ष में ₹10000 से ज्यादा होता था तो उसके ऊपर टीडीएस काट लिया जाता था, तो निवेशक अपनी जमाओं को बहुत सारे टुकड़े में फिक्स डिपाजिट कर देते थे। जिससे कि वह टीडीएस काटने से बच सकें। लेकिन अब एक ही बैंक में अगर विभिन्न ब्रांच में आपकी जमा है और अगर ₹10000 से ज्यादा ब्याज होता है, तो उसके ऊपर टीडीएस कट जाएगा। ध्यान रखें अब आवर्ती जमा खाते यानी कि रिकरिंग डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज भी टीडीएस के अंतर्गत है। जैसे ही आपका टीडीएस कटता है वैसे ही वह आपके पैन नंबर से लिंक हो जाता है और आयकर विभाग को इसका पता चल जाता है।

6. अपना आधार नंबर आयकर रिटर्न में शामिल करें: व्यक्तिगत तौर पर जिनके पास भी आधार कार्ड है। उन्हें अपने आयकर रिटर्न में आधार कार्ड का नंबर जरुर देना चाहिए। जिनके पास में आधार कार्ड नहीं है केवल उन्हें ही इस नियम की छूट है। अगर आपके पास में आधार है तो पैन नंबर के साथ उसको लिंक करना बहुत जरुरी है। अगर आप आयकर का रिटर्न फाइल कर रहे हैं। यह बहुत ही आसान है इसके लिए आप हमारे फाइनेंसर बकवास चैनल पर वीडियो देख सकते हैं।

7. पुराने सेवा प्रदाता की आय को मत छोड़िए : कुछ लोग सोचते हैं की वह कम कर दे कर बच जाएंगे। अगर वह अपने पुराने सेवाप्रदाता का रिटर्न फाइल नहीं करेंगे या आयकर विभाग को नहीं बताएंगे। तो ध्यान रखें यह आपकी भूल है, अगर कोई भी आयकर आपके पहले सेवा प्रदाता ने काटा है, तो वह फॉर्म 26 AS में आ जाएगा और अगर आप उसे अपनी आय में शामिल नहीं करते हैं तो यह अपने आप गड़बड़ी के रूप में पकड़ में आ जाएगा और आपको बहुत ही जल्दी आयकर विभाग से नोटिस मिलने की संभावना रहेगी।

सबसे बेहतर तरीका है, आप अपने नए सेवा प्रदाता को अपनी पुरानी सेवा प्रदाता का फॉर्म 16 दे दें या फिर जो भी आय पुराने सेवा प्रदाता से हुई है वह बता दें, जिससे आपका आयकर सही तरीके से वह गणना कर सकें।

8. विदेशी संपत्ति और आय बताना : आपको अपने सारे विदेशी संपत्ति विदेशी बैंक खाते की जानकारी आयकर विभाग को देनी चाहिए, जैसे की खाता खुलने की दिनांक, उस पर कितना ब्याज मिला, इस वित्तीय वर्ष में और कौन से शेड्यूल में आपको यह आय हुई है।

9. अगर आपकी आय 50 लाख से ज्यादा है तो आपको अपनी सारी संपत्ति बतानी होगी : पिछले साल 10 फीसदी सरचार्ज आयकर पर लगने वाला 1 करोड़ रूपए से 50 लाख रूपए कर दिया गया। इस साल सरचार्ज 15 फीसदी कर दिया गया है, आयकरदाता जो कि इस आय के ब्रैकेट में आते हैं। उन्हें अपनी सारी चल और अचल संपत्ति जो उनके पास है, वह भी बताना होता है। आयकर विभाग चाहता है कि उनके पास आपकी सारी वित्तीय जानकारी उपलब्ध हो।

अगर आपके पास जमीन या बिल्डिंग जो की अचल संपत्ति में होती है, वह भी बताना होती है। चल संपत्ति यानि की सभी तरहे के वाहन, जिसमें की याट बोर्ड और एयरक्राफ्ट शामिल हैं, गहने बुलियन और अन्य महंगी धातु भी शामिल हैं।

10. अंतिम तिथि के पहले रिटर्न भरते हैं और रिटर्न को जांच लें : आयकरदाता को यह नियम हमेशा याद रखना चाहिए और उसे भूलने की कोई भूल नहीं करना चाहिए। हमेशा अपना आयकर रिटर्न 31 जुलाई के पहले भर दीजिए। पिछले साल तक अगर आप देरी से रिटर्न भरते हैं थे तो उस पर किसी पेनल्टी का प्रावधान नहीं था। अगर आपने पिछले 2 सालों का रिटर्न नहीं भरा है और आपने सारे आयकर समय पर अदा कर दिए हैं, तो आप बिना किसी हिचक के वह रिटर्न फाइल कर सकते हैं लेकिन अब नियम बदल गए हैं।

पहले पुराने रिटर्न किसी भी समय एक वर्ष में भरे जा सकते थे तो 2014 15 वित्तीय वर्ष का रिटर्न 31 मार्च 2017 तक भरा जा सकता था। लेकिन अब पुराने रिटर्न समान असेसमेंट ईयर में भरना होंगे यानी कि 31 मार्च 2016 तक। तो एक साल का समय रिटर्न भरने के लिए कम कर दिया गया है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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