Sunday April 30,2017

नीलामी में कैसे खरीदें संपत्ति

Published Aug 17, 2016   मोलतोल संवाददाता  

क्या आप शहर में एक घर खरीदना चाहते हैं लेकिन क्या रियल्टी की अत्यधिक कीमतें ऐसा करने से आपको रोक रही हैं? आप बैंक द्वारा नीलाम की जा रही प्रॉपर्टी के लिए बोली लगाने की कोशिश कर सकते हैं। कानून बैंक को यह अनुमति देता है कि वह डिफॉल्ट हुए ऋणी से अपनी रकम वसूलने के लिए उसकी संपत्ति नीलाम कर दे। इसके लिए बैंक उक्त नीलाम की जाने वाली संपत्ति के लिए प्रचलित बाजार दर से 20-25 प्रतिशत कम कीमत आरक्षित (वह न्यूनतम मूल्य जिस पर संपत्ति को बेचा जाएगा) करता है। बोलीदाताओं के लिए यह एक मोलभाव भी हो सकता है। चूंकि यह नीलामी बैंक द्वारा की जाती है इसलिए इस प्रकार की प्रॉपर्टी एकदम साफ और बिना किसी झंझट के होती है।

जेब भारी होना आवश्यक : हालांकि, नीलामी प्रक्रिया की एक निश्चित समयावधि होती है, जिसमें खरीदार को डील फाइनल करने के लिए पैसे की व्यवस्था करने की जरूरत होती है। इसलिए यह जरूरी है कि आपकी जेब में एक बड़ी धनराशि हो। बैंक प्रस्तावित नीलामी के बारे में अखबारों में एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर बोली आमंत्रित करते हैं। नोटिस में संपत्ति का ब्यौरा, दिनांक, समय, नीलामी स्थल, आरक्षित मूल्य और अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट की जानकारी शामिल होती है। नोटिस में उस दिनांक का भी उल्लेख होता है जिस दिन इच्छुक पार्टियां अपनी बोली प्रस्तुत करने से पहले उक्त संपत्ति का निरीक्षण कर सकती हैं। बोलीदाताओं को अपनी राशि का उल्लेख करते हुए बैंक में आवेदन देना होता है। याद रहे कि बोलीदाता की राशि आरक्षित राशि से कम नहीं होनी चाहिए।

इसके साथ ही बोलीदाता को अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट भी देना होता है, जो आरक्षित राशि का तकरीबन 10 प्रतिशत हो सकता है। आमतौर पर नीलामी सार्वजनिक सूचना की तारीख से 30 दिनों के बाद की जाती है। इस अवधि में, डिफॉल्टर ऋणी अपनी बकाया राशि बैंक में जमा कर सकते हैं। यदि ऋणी अपने बकाया ऋण का भुगतान कर देते हैं तो नीलामी नहीं होगी और आपका अर्नेस्ट मनी डिपोजिट भी वापस कर दिया जाएगा। यदि नीलामी होती है और आप बोली नहीं जीत पाते हैं तब ऐसी स्थिति में भी आपका अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट वापस होगा। यदि आप बोली जीत जाते हैं तो नीलामी वाले दिन ही आपको कुल बोली राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा (अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट घटाकर) भुगतान करना होगा।

बाकी शेष रकम का भुगतान आपको अगले 15 दिनों या फिर आपके और बैंक के बीच सहमति के आधार पर निश्चित की गई समयावधि में करना होगा। यदि आप बोली जीतते हैं लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक राशि का भुगतान नहीं कर पाते, तो आपके द्वारा पहले भुगतान की गई राशि बैंक द्वारा जब्त कर ली जाती है। इसलिए इस रास्ते पर आप तभी आगे बढ़ें जब आपके पास पर्याप्त धनराशि का प्रबंध हो। बैंक ऐसी प्रॉपर्टी के अधिग्रहण के लिए ऋण की पेशकश भी कर सकते हैं। लेकिन बैंक इसके लिए निश्चित समयसीमा देते हैं, इसलिए आपको नीलामी दिनांक से पहले ही ऋण के लिए सारे प्रबंध करने होंगे।

ऑनलाइन और ऑफलाइन: नीलामी के जरिए संपत्ति खरीदने में आपको काफी मेहनत करनी पड़ती है। बैंक द्वारा इस प्रकार की नीलामी की सूचना का पता करने के लिए आपको प्रतिदिन अधिक से अधिक समाचार पत्रों को देखना होगा, साथ ही आवश्यक कार्रवाई के अलावा जल्द ही पर्याप्त धन की व्यवस्था भी करनी होगी। या फिर आप ऐसे रियल एस्टेट एजेंट से भी संपर्क कर सकते हैं, जिसे इस तरह की नीलामी की जानकारी हो। साथ ही आप कुछ वेबसाइट जैसे डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट फोरक्लोजरइंडिया डॉट कॉम भी देख सकते हैं, जहां बैंकों द्वारा नीलाम की जाने वाली संपत्ति की पूरी जानकारी होती है।

एक सामान्य (ऑफलाइन) प्रॉपर्टी नीलामी में, बोली लगाने वाले को नीलामी स्थल पर पहुंचकर अपनी बोली लगानी होती है। बोली राशि बढ़ाने के लिए बैंक बोलीदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा भी करवा सकते हैं। ऑनलाइन प्रॉपर्टी नीलामी में, प्रक्रिया काफी हद तक समान है, लेकिन बोलीदाता वेबसाइट के जरिए अपनी बोली लगा सकते हैं या उसे संशोधित कर सकते हैं। ऑनलाइन नीलामी विधि अभी तक भारत में ज्यादा सफल नहीं हो पाई है। ऑनलाइन धोखाधड़ी का डर, उत्पादक संघ द्वारा हेरफेर का जोखिम और बोलीदाताओं का जागरूक न होना इसके मुख्य कारण हैं।

इसके अलावा और क्या देखें: लाभ के बावजूद, नीलामी के माध्यम से प्रॉपर्टी प्राप्त करना हर किसी के लिए आसान नहीं है। यदि नीलामी आक्रामक बोलियों को आकर्षित करती हैं, तो मूल्य के अधिक ऊपर जाने की संभावना रहती है और इससे लाभ कम हो सकता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप बाजार मूल्य का आंकलन करें और बुद्धिमानी से बोली लगाकर अच्छा सौदा प्राप्त करें। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से यह बेहतर होगा कि बोली लगाने के निर्णय से पहले एक वकील की मदद से प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की भलिभांति जांच कर लें। इसके अलावा, इस बात का ध्यान रखें कि बैंक द्वारा नीलाम की जा रही प्रॉपर्टी जहां और जैसी स्थिति के आधार पर होती है।

इसका मतलब है कि किसी भी मरम्मत, नवीनीकरण, बकाया प्रॉपर्टी टैक्स, बकाया बिजली बिल व अन्य देनदारियों का बोझ भी खरीददार द्वारा वहन किया जाएगा। इसके अलावा खरीदार को अन्य खर्च जैसे स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क का भी खर्च स्वयं उठाना होगा। इसलिए खरीदी जाने वाली संपत्ति का अच्छी तरह निरीक्षण कर सही कीमत का आकलन करना चाहिए। इसके अलावा, कुछ लोग नीलामी की संपत्ति को अशुभ मानते हैं और वे इसके बारे में ऐसी गलत बातें फैला देते हैं कि बाद में संपत्ति का मालिक अपनी इच्छानुसार उसे बेच नहीं पाता। यही कारण है कि इस प्रकार की प्रॉपर्टी को मार्केट रेट से कम रेट पर बेचा जाता है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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