Sunday November 19,2017

सरसों तेल विकास बोर्ड का गठन जरुरी : विवेक पुरी

Published Jan 18, 2016 12:00:00   मोलतोल संवाददाता  

सरसों तेल उद्योग के सही विकास के लिए सरसों तेल विकास बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए एवं सरसों को राष्‍ट्रीय फसल घोषित करना चाहिए। इससे खाद्य तेल का जहां आयात घटाने में मदद मिलेगी वहीं समूचे उद्योग का संगठित विकास होगा। मौसम अनुकूल होने से कम बोआई के बावजूद देश में इस साल सरसों का उत्‍पादन पिछले साल से अधिक होगा। सरसों एवं सरसों तेल उद्योग के विकास से जुड़े अनेक अहम सवालों को लेकर पुरी ऑयल मिल्‍स, नई दिल्‍ली के प्रबंध निदेशक विवेक पुरी से मोलतोल डॉट इन ने बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्‍य अंश:

देश में इस साल सरसों का कितना उत्‍पादन होने का मोटे तौर पर अनुमान है एवं फसल की स्थिति कैसी है ?

सरसों की बोआई और फसल स्थिति इस समय काफी बेहतर है। यदि मौसम ने साथ दिया तो इस साल सरसों की फसल अच्‍छी होगी। इस समय सरसों की फसल के लिए मौसम-पानी की हालत अच्‍छी है। यद्यपि, सर्दी का कम होना थोड़ी चिंता वाली बात थी। उत्तर प्रदेश में सरसों की बोआई पिछले सीजन से दुगुनी हुई है। पंजाब-हरियाणा में बोआई कुछ बढ़ी है एवं राजस्‍थान में पांच-दस फीसदी कम हुई है। पूरे देश में सरसों की बोआई लगभग 5-6 प्रतिशत कम हुई है। पिछले साल बारिश और ओले गिरने से सरसों की 10-20 फीसदी फसल खराब हुई थी। इस साल सरसों की बोआई 5-6 फीसदी कम आंकी जाए तो भी फसल पिछले साल की तुलना में परिस्थितियां अनुकुल रहने पर थोड़ी ज्‍यादा आ सकती है।

इस साल सरसों में फूल लगने के बाद फल भी आने लगे हैं। पिछले साल की तुलना में पौधों में फली की मात्रा 10-15 फीसदी ज्‍यादा देखने को मिल रही हैं। यदि मौसम अच्‍छा रहता है तो फसल का विकास बेहतर होगा। कुल मिलाकर सरसों की फसल अच्‍छी स्थिति में है एवं मौसम ने अंत तक साथ दिया तो उपज पिछले साल से बेहतर रहेगी।

सरसों तेल काफी महंगा है, क्‍या यह ऊपरी भाव पर बना रहेगा या इसमें आगे चलकर नरमी के कोई संकेत है ?

जनवरी में हमेशा सरसों कमोडिटी की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव रहता है। पिछले कुछ दिनों से सरसों तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है और आने वाले दिनों में यह और नरम पड़ सकता है क्‍योंकि नई सरसों की फसल फरवरी के दूसरे हफ्ते के बाद बाजार में आ सकती है। गुजरे कुछ महीनों में सरसों तेल की कीमतें काफी ज्‍यादा रही हैं और इसका असर खपत पर पड़ा है। ऐसे में उपभोक्‍ताओं ने सस्‍ते खाद्य तेलों का इस्‍तेमाल शुरु कर दिया है।

सस्‍ते आयातित तेलों से घरेलू तेल उद्योग को भारी सफर करना पड़ रहा है, देश में तिलहन की उपलब्‍धता बढ़ाने के लिए क्‍या कदम उठने चाहिए ?

देश में सरसों तेल उद्योग के समन्वित विकास के लिए सरसों तेल विकास बोर्ड का गठन किया जाए। उद्योग का मानना है कि मलेशियाई सरकार के पाम तेल को राष्‍ट्रीय फसल घोषित करने की तर्ज पर अगर हमारी केंद्र सरकार सरसों को राष्‍ट्रीय फसल घोषित कर दें तो सरसों तेल खाद्य तेल के आयात को घटाने में अहम भूमिका निभा सकता है। सरसों तेल पेराई एक असंगठित कारोबार है। इस उद्योग की सात हजार से नौ हजार इकाइयों में से केवल 20 फीसदी ही संगठित या ब्रांडेड सेगमेंट की हैं।

सरकार को देश में खाद्य तेल का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए अनुकूल पॉलिसी बनानी चाहिए जो किसानों, उपभोक्‍ताओं और निर्माताओं सभी के लिए हितकारी हो एवं जिससे तिलहन उत्‍पादन की सही कीमत मिले और किसान तिलहन की खेती के करने के लिए प्रेरित हो। तेल और तिलहन उद्योग को मेक इन इंडिया कार्यक्रम से जोड़ना चाहिए। जिस प्रकार मलेशिया के लिए पाम तेल, इटली के लिए जैतून तेल और अमरीका के लिए सोया तेल जितना अहम है, उसी तरह भारत के लिए सरसों तेल महत्‍वपूर्ण साबित हो सकता है। इस उद्योग के लिए नजरिये और योजना की जरुरत है।

सरसों के उन्‍नत बीजों के विकास पर किस तरह काम हुआ है और इसमें क्‍या गुंजाइश नजर आती है ?

पिछले कुछ सालों के दौरान कई ऐसी किस्‍में आई है जिनसे सरसों तेल उत्‍पादन में अच्‍छा इजाफा किया जा सकता है। लेकिन तिलहन की वे किस्‍में किसानों तक नहीं पहुंच सकी। अगर इन सुविधाओं से किसानों को लाभान्वित किया जा सके तो देश में तिलहन उत्‍पादन में भारी इजाफा किया जा सकता है। उम्‍मीद है कि केंद्र सरकार पीली क्रांति के तकनीकी मिशन को नया रुप देगी। निश्चित रुप से ऐसा अमल किए जाने पर एक बार फिर देश खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर होगा और खाद्य तेल आयात पर व्‍यय हो रही बहूमूल्‍य विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

अधिक सरसों का उत्‍पादन भारत के लिए अच्‍छी खबर होगी क्‍योंकि भारत अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए व्‍यापक रुप से आयात पर निर्भर है। देश में प्रमुख सरसों उत्‍पादक राज्‍यों में राजस्‍थान, गुजरात, मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र का स्‍थान आता है जबकि अकेले राजस्‍थान कुल उत्‍पादन में 50 फीसदी का योगदान करता है। देश में तिलहन की मुख्‍य फसलें सोयाबीन, मूंगफली और सरसों हैं जो कुल तिलहन उपज में 85 फीसदी योगदान देती हैं।

पुरी आयल मिल्‍स अन्‍य किन परियोजनाओं का संचालन कर रही है ?

पुरी आयल मिल्स कुछ वर्षों से करनाल और यमुना नगर (हरियाणा) औरचकशी (हिमाचल प्रदेश) में पनबिजली संयंत्र का परिचालन कर रही है। इसके अलावा कंपनी हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 14 मेगावट पनबिजली परियोजना लगाने की तैयारी कर रही है। इस परियोजना के लिए धन की व्यवस्था के लिए कंपनी विभिन्न विकल्प, मसलन- संयुक्त उद्यम, विकासात्मक कोष, निजी नियोजन आदि पर विचार कर रही है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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