Friday March 24,2017

पंजाब व हरियाणा में ओलावृष्टि के आसार, फसलों को नुकसान की आशंका

Published Mar 01, 2017   मोलतोल संवाददाता  

नई दिल्‍ली। पंजाब व हरियाणा में अगले 24 घंटों के दौरान बारिश होने के लिए मौसम अनुकूल बन गया है। दोनों राज्यों में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी आशंका है। अमृतसर, चंडीगढ़, पठानकोट, नवाशहर, होशियारपुर, जालंधर, अंबाला, पंचकुला और करनाल में बारिश होने की प्रबल संभावना है।

स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत में इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ पहुंच चुका है। इसी सिस्टम के प्रभाव से उत्तर भारत के मैदानी भागों में एक चक्रवाती सिस्टम भी विकसित हो गया है। यह सिस्टम इस समय उत्तरी राजस्थान और उससे सटे पंजाब तथा हरियाणा पर दिखाई बादलों के बढ़ते प्रभाव के रूप में अनुभव किया जा सकता है। यह दोनों सिस्टम धीरे-धीरे पूर्वी दिशा में बढ़ रहे हैं।

इन सिस्टमों की वजह से उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी बदलाव दिखाई देने लगा है। पंजाब व हरियाणा में इस समय बादल छाए हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आज रात में कहीं-कहीं हल्की वर्षा देखने को मिलेगी जबकि बुधवार को बारिश बढ़ जाएगी। बारिश की गतिविधियों के चलते इन राज्यों में दिन के तापमान में व्यापक गिरावट आ सकती है जबकि न्यूनतम तापमान में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।

ओलावृष्टि के लिए भोर का समय सबसे अनुकूल माना जा रहा है। दोनों राज्यों में ज़्यादातर फसलें परिपक्व होने की अवस्था में हैं। ऐसे में ओला पड़ने से फसलों को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। ना सिर्फ ओलावृष्टि बल्कि बारिश के चलते भी फसलों को नुकसान हो सकता है क्योंकि कई फसलों की कटाई-मड़ाई का काम जल्द शुरू होने वाला है।

पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य हैं। संभावित बारिश के चलते किसानों में फसलों के नुकसान को लेकर डर है। गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की अगड़ी किस्में जब परिपक्व हो जाती हैं तब फसलों को नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अगड़ी फसल की कटाई-मड़ाई जल्द शुरू हो सकती है जबकि देर से बोई गई गेहूं की फसल में दाने बनने शुरू हो गए हैं ऐसे में ओलावृष्टि दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। गेहूं के अलावा चने की फसल को भी ओला नुकसान पहुंचा सकता है। चने की फसल में ओलावृष्टि से फूल टूट सकते हैं जिससे फसल को क्षति पहुंचने की आशंका है।

मैदानी राज्यों में सरसों की फसल भी परिपक्व होने की अवस्था में है और मौसम अगर अनुकूल रहा तो जल्द ही इसकी कटाई-मड़ाई शुरू हो सकती है। ऐसे में अगले 24 घंटों के दौरान बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि इस तिलहन फसल को व्यापक रूप में नुकसान पहुंचा सकती है। अधिकांश फसलें इस समय जिस स्थिति में हैं ऐसे में बारिश या ओलावृष्टि के चलते फसलों को ना सिर्फ नुकसान होता है बल्कि इनकी गुणवत्ता भी खराब होती है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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