Monday September 25,2017

क्या आप सुरक्षित आर्थिक जीवन के लिए प्रतिबद्ध हैं ?

Published Sep 04, 2016   विवेक रस्‍तोगी  

हम कमाते हैं, हम घर के खर्चों को उठाते हैं, बैंक के ऋण की किस्त चुकाते हैं और हमारी बचत बैंक में हो ही रही है। और फिर बाद में हम अपनी कमाई की बचत से सावधि जमा (Fixed Deposit) बनवा लेते हैं और थोड़े समय बाद फिर से एक और बनवा लेते हैं। इस तरह हम अपनी कमाई की बचत से सावधि जमा (Fixed Deposit) विभिन्न परिपक्वता तिथियों वाली बनाते रहते हैं और मुद्रास्फीति के कारण पता चलता है कि लंबे समय में हमारा जमा किया गया धन यानि कि मूलधन भी कम ही हो रहा हैं।

कभी कभी चढ़ता हुआ स्टॉक बाजार हमें आकर्षित करता है और हम इक्विटी के जोखिम से बचने के लिए इक्विटी वाला एक सिस्टमेटिक इनवेस्टमेन्ट प्लॉन (systematic investment plan) ले लेते हैं। अगर बाजार तेजी से नीचे की ओर जाता है तो हम हमारे निवेश को लेकर हताश हो जाते हैं और इस निराशा में हमें समझ ही नहीं आता है कि हमारे बाजार में किए गए निवेशों का क्या होगा, ये हमारे अनुकूल होंगे या नहीं और हम सिस्टमेटिक इनवेस्टमेन्ट प्लॉन में निवेश करना बंद कर देते हैं। फिर फरवरी और मार्च में हम किसी दोस्त के या किसी एजेंट के या फिर किसी बीमा कर्मचारी के मार्गदर्शन में हम और जीवन बीमा खरीदते हैं, जिससे कि आयकर में छूट प्राप्त हो।

वैसे ही नियोक्ता स्वास्थ्य बीमा केवल कर्मचारी और उसके परिवार यानि कि बीबी और बच्चों को ही बीमा देते हैं, लेकिन इसमें आपके अभिभावकों का बीमा शामिल नहीं होगा और फिर किसी सप्ताहांत में हम सोचने लगता है कि कहीं मेरी वित्तीय परिस्थिती खराब तो नहीं है?, क्या वाकई मेरे निवेश सही जगहों पर हैं?, क्या मेरे निवेश से मेरा भविष्य सुरक्षित है? हम घबराने लगते हैं पर हमें अपनी वित्त याने कि भविष्य के निवेश को अच्छी तरह से सोच समझकर तय करना चाहिए और उसके लिए हमें कुछ बातों का ध्यान प्राथमिकता पर रखना होगा।

1. पहले अपनी आमदनी के आयकर वर्ग को पहचानें: सबसे पहले आमदनी आयकर वर्ग को पहचानना जरूरी है, क्योंकि इसी पर आपके निवेश की योजना बनती है। अगर कम आयकर वर्ग में हैं तो आप को वह वित्तीय उत्पाद नहीं दिया जा सकता जो कि अधिकतम आयकर वर्ग वाले को लेना चाहिए। अगर आपका आमदनी आयकर वर्ग सबसे कम या मध्यम है तो बेहतर है कि 80 सी की बचत आप EPF और PPF में करें, अभी इसकी निवेश सीमा 1.5 लाख रू. है।

2. ऑनलाइन टर्म प्लॉन खरीदें: अगर आपका परिवार है और वे आप पर आश्रित हैं तो आपको आज ही टर्म प्लॉन (सावधि बीमा) ले लेना चाहिए। आपको अधिकतम बीमित रकम वाला बीमा प्लॉन खरीदना चाहिए जो कि कम से कम आपकी वार्षिक आमदनी का 10-15 गुना हो।

3. आमदनी का 25-30 प्रतिशत बचायें: हम चाहे जितना कमा लें, जैसे जैसे कमाई बढ़ती जाती है वैसे वैसे खर्चे अपने आप ही बढ़ते जाते हैं जो कि हमारे घर का मासिक घर खर्च कहलाता है, कुछ वित्तीय खर्चे ऐसे होते हैं जिन्हें आप बाद में नहीं कर सकते हैं जैसे कि बीमा प्रीमियम, ऋण की किस्त और आयकर बचाने वाले वित्तीय उत्पाद जैसे कि PPF, ELSS, Bonds इत्यादि। आपको निश्चिंत करना चाहिए कि यह सब मिलाकर कम से कम आपकी कमाई का 25-30 प्रतिशत आप बचा रहे हैं। ध्यान रखिए कि आपके भविष्य में आने वाले सारे बड़े खर्च बच्चों की शिक्षा, बच्चों की पढ़ाई और सेवानिवृत्ति का धन सब इसी बचत से आने वाला है, इसलिये संभलकर और सोच समझकर निवेश करिए। ध्यान रखिए कि गृह ऋण छोड़कर सभी ऋणों को जल्दी से जल्दी चुका दीजिए। गृह ऋण से आपको हर वित्तीय वर्ष के आयकर में 2.5 लाख तक मूलधन और ब्याज मिलाकर छूट प्राप्त होती है।

4. अपनी बचत को सही जगह निवेश करें: वित्तीय बाजार में बहुत सारे वित्तीय उत्पाद उपलब्ध हैं जो कि सावधि जमा (Bank FDs, Bond funds, PPF etc.), सोना, अचल संपत्ति, बीमा, इक्विटी आधारित म्‍युचुअल फंड्स होते हैं। पांच वर्ष से ज्यादा वाले लक्ष्यों के लिए सही अनुपात में सावधि जमा और इक्विटी आधारित म्‍युचुअल फंड्स में निवेश करने चाहिए जैसे कि बच्चों की पढ़ाई, शादी का खर्च और सेवानिवृत्ति का धन। बैंकों में बहुत ज्यादा सावधि जमा भी खराब है, नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनके रिटर्नस निर्धारित होते हैं जबकि इक्विटी आधारित म्‍युचुअल फंड्स भले ही अस्थिर होते हैं पर लंबे निवेश अवधि में उनके रिटर्नस ज्यादा अच्छे होते हैं। 100 वर्ष को आप निवेश का पैमाना मानकर चलें और अगर आपकी उम्र 25 वर्ष है तो इसका मतलब है कि आपको 25 प्रतिशत सुरक्षित निवेश करना है और 75 प्रतिशत इक्विटी आधारित म्यूचयल म्‍युचुअल में करना चाहिए जहां ज्यादा जोखिम है।

5. भारी भरकम निजी दुर्घटना बीमा लें: एक अच्छा सा बड़े बीमा रकम का निजी दुर्घटना बीमा अवश्य लेकर रखें, भविष्य कभी किसी को कुछ बताकर नहीं आता है, तो जिस बीमे में व्यापक अधिकतम आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध हो लेना चाहिए। जिसमें कि स्थाई पूर्ण विकलांगता (Permanent Total disability), स्थायी आंशिक विकलांगता (Permanent partial disability), अस्थायी पूर्ण विकलांगता (Temporary total disability) की सुरक्षा जरूर होनी चाहिए।

6. स्वास्थ्य बीमा जरूर लें: अगर आपको नियोक्ता से पूरे परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है और वह बीमा आपके लिए काफी है तो अलग से बीमा खरीदने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर आप निजी संस्था में काम करते हैं और अपनी नौकरी बदलते रहते हैं तो बेहतर है कि आप खुद से एक स्वास्थ्य बीमा ले लें।

यह प्राथमिक वित्तीय आयोजना (Basic Financial Planning) है, जो कि हमारे जीवन की अधिकतम जरूरतों का प्रबन्धन कर देता है। और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अधिकतर लोग मतलब कि लगभग 90 प्रतिशत लोग इन चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं। सही वित्तीय उत्पादों को लेने के पहले आप उसके बारे में पूरी जानकारी जरूर लें और सुनिश्चित करें कि आप खुद और अपने परिवार के सुरक्षित आर्थिक जीवन के लिये प्रतिबद्ध हैं ।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)




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